भारत में जलवायु आपातकाल है!
इंडिया एक क्लाइमेट इमरजेंसी में है
यह है राधिका गोविंद राजन का पोस्ट जहां वह कहती है कि दिल्ली में इतनी गर्मी है कि चमगादड़ भी पेड़ों से गिर रहे हैं। अब इमेजिन करो कि इंसानों के साथ क्या हो रहा है।
यह हैं कृष्णा जी जो अपने करीब 60 साल के पति कृष्णकांत अवस्थी की फोटो दिखा रही है। 31 मई को उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर में उनके पति काम के लिए डीएम ऑफिस गए थे। 15 किमी साइकिल चलाने और 9 घंटे की शिफ्ट करने के बाद वो घर लौटे, खाना खाया और सो गए। लेकिन वो नींद से कभी उठे नहीं।
गर्मी से हो रही मौतें
उसी रात 17 गवर्नमेंट एंप्लॉयज की भी मौत हुई मिर्जापुर और पास के सोनभद्र इलाके में। कारण था गर्मी। दुनिया में शायद कहीं और ऐसा होता तो बड़ा बवाल मच जाता, लेकिन हमारे देश में आपको इसकी भनक भी नहीं लगी होगी।
इसकी बजाय गवर्नमेंट के मिनिस्टर सूडो साइंस प्रमोट कर रहे हैं। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया से हीट वेव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि प्याज पॉकेट में रखो, कुछ नहीं होगा।
“प्याज पॉकेट में रखो, कुछ नहीं होने वाला।”
अगर ऐसा ही है तो पूरे देश में एक गवर्नमेंट प्रोग्राम स्टार्ट कर दो जहां प्याज बांटे जाएं। दुनिया को बता देना चाहिए कि इंडिया के पास क्लाइमेट चेंज का सलूशन है।
दिल्ली और देशभर में हालात
हमारे देश ने इस साल एक डेडली हीट वेव सहन की है। दिल्ली एनसीआर में सिचुएशन इतनी खराब है कि लोगों के एसी और गाड़ियों में आग लगने लगी। नल से निकलने वाला पानी भी उबलता हुआ महसूस हो रहा था।
सरकारी अस्पताल इमरजेंसी से लड़ नहीं पा रहे थे। मरीजों को बचाने के लिए आइस टब और आइस मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
सिर्फ दिल्ली नहीं, पूरा देश संकट में
अगर दिल्ली में गर्मी का कहर है तो कोस्टल इलाकों में बाढ़ आ रही है। पहाड़ों में लैंडस्लाइड हो रहे हैं और वेस्टर्न इंडिया में जमीन बंजर बनती जा रही है।
इस क्लाइमेट चेंज का सबसे ज्यादा असर गरीब लोगों पर पड़ेगा।
बढ़ती हीट वेव और वैज्ञानिक चेतावनी
राजस्थान में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। बीकानेर में जवान गर्मी में पापड़ और अंडे तक उबाल रहे थे।
2021 की एक स्टडी ने दिखाया था कि क्लाइमेट चेंज की वजह से अप्रैल और मई में हीट वेव्स की संभावना नॉर्थ इंडिया में 100 गुना बढ़ गई है।
एल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग
इस हाई टेंपरेचर के पीछे एक कारण एल नीनो भी है। यह एक क्लाइमेट पैटर्न है जो मानसून की बारिश को प्रभावित करता है।
लेकिन इसके पीछे इंसानी कारण भी हैं। फॉसिल फ्यूल्स जलाना, पेड़ों की कटाई और बढ़ती ग्रीनहाउस गैसेस ने तापमान को और बढ़ा दिया है।
अर्बन हीट आइलैंड का असर
दिल्ली के सैनिक फार्म और संगम विहार को देखिए। सैनिक फार्म अमीर इलाका है, लेकिन संगम विहार ज्यादा गर्म है क्योंकि वहां पेड़ नहीं हैं।
यही अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट है, जहां कंक्रीट शहरों में गर्मी फंस जाती है।
असम की बाढ़ और साइक्लोन
जहां दिल्ली में लोग गर्मी से मर रहे हैं, वहीं असम में लोग बारिश रुकने की प्रार्थना कर रहे हैं। भारी बारिश और लैंडस्लाइड की वजह से कई लोगों की जान गई।
2020 की एक स्टडी ने दिखाया कि साइक्लोन से प्रभावित जिलों की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है।
एयर पॉल्यूशन और अंधभक्ति
दिल्ली में एयर पॉल्यूशन की वजह से लोगों की जिंदगी औसतन 12 साल कम हो जाती है। लेकिन चुनावों में यह मुद्दा नहीं बनता।
रिसर्च में पाया गया कि लोग अपनी पसंदीदा पार्टी को दोष देने से बचते हैं और दूसरी पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हैं।
आम लोगों पर असर
महाराष्ट्र की किसान रुक्मिणी कामले खेत में काम करते-करते बेहोश हो जाती थीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिंदगी भर खेतों में काम किया लेकिन ऐसी गर्मी पहले कभी महसूस नहीं की।
ह्यूमिडिटी और तापमान बढ़ने पर इंसानी शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता। इससे मल्टी ऑर्गन फेलियर तक हो सकता है।
सरकार और डेटा की समस्या
कई मामलों में हीट स्ट्रोक से हुई मौतों को हार्ट अटैक बताया जाता है ताकि मुआवजा न देना पड़े।
2022 की स्टडी के अनुसार 2004 से 2021 के बीच हीट रिलेटेड मौतें 55 प्रतिशत बढ़ गई हैं।
भविष्य कितना खतरनाक हो सकता है
भविष्य में देश की 90 प्रतिशत आबादी हीट वेव से प्रभावित हो सकती है। हीट वेव्स की अवधि भी बढ़ती जाएगी।
सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्हें रोज धूप में काम करना पड़ता है जैसे मजदूर, सिक्योरिटी गार्ड, ट्रैफिक पुलिस और ठेले वाले।
समाधान क्या है
सबसे पहले हमें यह स्वीकार करना होगा कि क्लाइमेट चेंज एक वास्तविक समस्या है।
सरकार को क्लाइमेट चेंज पर हाई पावर्ड कमेटी बनानी चाहिए जिसमें सेंट्रल, स्टेट और लोकल गवर्नमेंट की भागीदारी हो।
लोकल गवर्नेंस को मजबूत करना होगा ताकि शहर और गांव बेहतर प्लानिंग कर सकें।
क्लाइमेट चेंज को इग्नोर करने से समस्या खत्म नहीं होगी। उसे स्वीकार करना और समाधान पर काम करना जरूरी है।
सरकार को हीट स्ट्रोक के डेटा को छुपाने की बजाय स्वीकार करना चाहिए और साइंस के साथ मिलकर क्लाइमेट चेंज का समाधान निकालना चाहिए।
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