Tamil Nadu: India's Best State?
तमिलनाडु की इकोनॉमिक ग्रोथ: विनफास्ट प्लांट और डबल डिजिट डेवलपमेंट की कहानी
जब एक राज्य लगातार सालों तक एजुकेशन, हेल्थकेयर और इंडस्ट्रियल पॉलिसी पर फोकस करता है, तो नतीजे चौंकाने वाले होते हैं।
वियतनाम के बाहर पहला प्लांट: तमिलनाडु में विनफास्ट की एंट्री
हाल ही में एक ऐसी खबर आई जिस पर कम लोगों का ध्यान गया। वियतनामी ईवी कार कंपनी विनफास्ट ने वियतनाम के बाहर अपना पहला असेंबली प्लांट तमिलनाडु में खोला। चीफ मिनिस्टर एमके स्टालिन ने तमिलनाडु के पोर्ट शहर तूतीकोरिन में विनफास्ट की प्रोडक्शन लाइन की पहली गाड़ी पर साइन किया।
कंपनी ने ₹16,000 करोड़ के निवेश का वादा किया है जिससे सालाना 1.5 लाख गाड़ियां असेंबल होंगी। विनफास्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने साफ कहा कि उनका फोकस आसपास के लोगों को नौकरियां देने पर है। अब तक 200 से ज्यादा पॉलिटेक्निक स्टूडेंट्स को नौकरी दी जा चुकी है और प्लांट से कम से कम 3,000 डायरेक्ट जॉब्स के साथ सप्लाई चेन इकोसिस्टम में हजारों इनडायरेक्ट जॉब्स क्रिएट होंगी।
सिर्फ विनफास्ट ही नहीं, इन्वेस्टमेंट की लंबी लिस्ट
यह कोई इकलौता निवेश नहीं है जो तमिलनाडु में हुआ हो। 2024 में ताइवानी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फॉक्सकॉन की सब्सिडियरी यूज़ ऑन टेक्नोलॉजी ने iPhone कॉम्पोनेंट्स बनाने के लिए ₹1000 करोड़ का निवेश किया। फॉक्सकॉन की मेन कंपनी तो पहले से ही श्रीपेरंबदूर में काम कर रही है जहां उन्होंने 40,000 से ज्यादा जॉब्स क्रिएट की हैं। इसके अलावा आरजी ग्रुप ने फाइबर प्लांट सेटअप किया है और जीएमएसी मल्टी लेयर पीसीबी और रडार सिस्टम बना रही है।
डबल डिजिट ग्रोथ का आंकड़ा
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में तमिलनाडु 11.2% की ग्रोथ के साथ देश की इकलौती स्टेट है जिसकी डबल डिजिट इकोनॉमिक ग्रोथ हुई। महाराष्ट्र 7.3%, कर्नाटक 7.4% और उत्तर प्रदेश 9% पर रहे।
20 साल पहले तमिलनाडु की इकॉनमी पाकिस्तान की इकॉनमी का एक तिहाई थी। आज दोनों इकॉनमी बराबर हैं। इंडिया के फॉर्मर चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि जो तमिलनाडु ने किया है, वही हमें उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में करना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग: अमीर बनने की आजमाई हुई रेसिपी
जब हम तेजी से बढ़ती इकॉनमी की कल्पना करते हैं, अक्सर लैपटॉप पर कोडिंग करते लड़के-लड़कियों की तस्वीर बनती है। पर असल में विकसित देशों के अमीर होने के पीछे सबसे बड़ा योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा है। अमेरिका हो, यूनाइटेड किंगडम हो या चीन — ये सब मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करके ही अमीर हुए हैं।
चीन आज दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग कैपिटल है और करीब 30% ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट वहीं से आता है। तमिलनाडु अब यही रेसिपी फॉलो कर रही है — एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करना ताकि कंपनियां अपने ऑपरेशन यहां सेटअप करना चाहें।
इंजीनियर्स का पावरहाउस
सरकार के एनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग में सबसे ज्यादा लोग तमिलनाडु में काम करते हैं। इसके पीछे सालों की प्लानिंग है। पूरे देश के 17% इंजीनियर्स सिर्फ तमिलनाडु में हैं। स्टेट में करीब 500 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं और NIRF रैंकिंग में टॉप 100 में सबसे ज्यादा 13 कॉलेज तमिलनाडु के हैं — कर्नाटक में 9, दिल्ली में 7, तेलंगाना में 6।
आईटीआई और पॉलिटेक्निक पर फोकस
इंजीनियरिंग कॉलेजों के अलावा तमिलनाडु ने पॉलिटेक्निक और आईटीआई (इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) पर जबरदस्त फोकस किया — जहां ब्लू कॉलर वर्कर्स को ट्रेनिंग मिलती है। इससे उन छात्रों को मौका मिलता है जो आईआईटी नहीं गए लेकिन उनमें उतना ही जज्बा है।
रेवती — मां-बाप गाड़ी चलाते और सब्जी बेचते हैं। सरकारी अपस्किलिंग कोर्स करके आज तमिलनाडु की एक फैक्ट्री में काम कर रही हैं।
अनुश्री — तिरुपुर के एक टेलर की बेटी। क्लाउड कंप्यूटिंग का कोर्स किया और अब तमिलनाडु की ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा हैं।
महिला वर्कफोर्स: फैक्ट्री फ्लोर का बदला चेहरा
तमिलनाडु की फैक्ट्रियों की सबसे दिलचस्प बात यह है कि वहां बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं। 2021 के सरकारी सर्वे के अनुसार भारत की फैक्ट्रियों में काम करने वाली करीब 15 लाख महिलाओं में से 42% अकेले तमिलनाडु में हैं।
फॉक्सकॉन की तमिलनाडु फैक्ट्री में 40,000 वर्कर्स में से 35,000 महिलाएं हैं। जब एक चाइनीज इंजीनियर ली इंडिया आए, तो उन्होंने देखा कि सब कुछ चाइनीज फैक्ट्री जैसा ही है — इक्विपमेंट, लेआउट — बस वर्कर्स लगभग सारी महिलाएं थीं।
इसके लिए तमिलनाडु ने जानबूझकर मेहनत की है — सेफ ट्रांसपोर्ट, अच्छी एजुकेशनल फैसिलिटीज, चाइल्ड केयर सपोर्ट, सेफ अकॉमोडेशन और हेल्थकेयर मुहैया कराई गई। गाइडेंस कंपनी के सीईओ विष्णु वेणुगोपाल कहते हैं कि तमिलनाडु के रूरल एरियाज में भी स्किल्ड महिलाएं मिल जाती हैं।
अदमनी (26) — पहले स्टे-एट-होम नर्स थीं। 2021 में फॉक्सकॉन की असेंबली लाइन में नौकरी मिली। कहती हैं: "पता भी नहीं था ट्वीज़र क्या होता है। न नाम पता था न पकड़ना आता था।" अब हर घंटे 500 वॉल्यूम कंट्रोल पार्ट्स स्टिच करती हैं।
एजुकेशन और हेल्थ: 70 साल पुरानी नींव
रोम एक दिन में नहीं बसा था, और तमिलनाडु का यह चेहरा भी एक दिन में नहीं बदला। आजादी के समय तमिलनाडु में सिर्फ 18% लिटरेसी रेट थी।
कामराज: 'कलवी थन' (फादर ऑफ एजुकेशन)
के. कामराज खुद स्कूल नहीं जा पाए थे, शायद इसीलिए वे दूसरों को यह मौका देना चाहते थे। उन्होंने स्कूल एजुकेशन फ्री की। जब रियलाइज हुआ कि भूख की वजह से बच्चे स्कूल नहीं आ रहे, तो 1956 में मिड-डे मील स्कीम लॉन्च की। असर तुरंत दिखा — स्कूलों में एनरोलमेंट बढ़ गई। बाद में पूरे देश ने इस स्कीम को अपनाया।
बाद में जयललिता जब मुख्यमंत्री बनीं, तो उन्होंने फ्री बस स्कीम और तमिलनाडु स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन जैसे प्रोग्राम लॉन्च किए। यानी पिछले 70 सालों से लगातार एजुकेशन और हेल्थ में निवेश हो रहा है।
हेल्थकेयर सिस्टम की ताकत
जॉन ड्रेज़, अमर्त्य सेन और कार्तिक मुरलीधरन जैसे अर्थशास्त्री तमिलनाडु के हेल्थकेयर सिस्टम की तारीफ करते हैं। स्टेट ने प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को प्रभावी ढंग से चलाया, लोकल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम और मैटरनिटी केयर पर काम किया। नतीजा: इन्फेंट डेथ रेट में तमिलनाडु देश में दूसरे नंबर पर है।
वर्ल्ड बैंक की मोनिका दास गुप्ता ने लिखा कि तमिलनाडु सरकार ने सुनिश्चित किया कि पॉलिसी बार-बार न बदले, जिससे स्टेट अच्छी लॉन्ग-टर्म प्लानिंग कर पाई।
पॉलिटिकल स्टेबिलिटी: ऑटो इंडस्ट्री को लाने की कहानी
1991 में इंडियन इकॉनमी लिबरलाइज हुई। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं जयललिता। ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपार संभावनाएं थीं।
फोर्ड को मनाने की जद्दोजहद
फोर्ड ने तीन शहरों — गुड़गांव, पुणे और मद्रास (चेन्नई) — में सर्वे किया। उनका झुकाव नॉर्थ और वेस्ट इंडिया की तरफ था क्योंकि मार्केट वहीं था। लेकिन मद्रास के पास स्किल्ड वर्कर्स, इंजीनियर्स, अच्छा पोर्ट और TVS मोटर्स व अशोक लीलैंड जैसी मौजूदा ऑटो कंपनियां थीं।
तमिलनाडु की सरकार ने फोर्ड के लिए रेड कारपेट बिछा दिया। फ्लूएंट इंग्लिश में बातचीत, तैयार डेटा, VIP ट्रीटमेंट। 200 से ज्यादा सवालों के जवाब दिए गए। यहां तक कि एक अजीब डिमांड — "प्लांट के 20 किलोमीटर के दायरे में ज्यादा धूल नहीं होनी चाहिए" — को भी माना गया। 36 एकड़ जमीन सिर्फ 30 करोड़ में दी गई। एक साल की बातचीत के बाद 1995 में फोर्ड ने मद्रास में फैक्ट्री लगाई।
हुंडई और राजनीतिक बदलाव की परीक्षा
इसके बाद वही मेहनत हुंडई के लिए भी की गई। लेकिन तभी जयललिता एक बड़े करप्शन केस में फंस गईं और करुणानिधि अगले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने शुरू में कहा कि वे जयललिता के वादे पूरे नहीं करेंगे। लेकिन उनके परिवार के सदस्य और केंद्रीय मंत्री मुरासोली मरन ने समझाया: "अगर आपने इस कंपनी के साथ ऐसा किया, तो आगे कोई भी कंपनी किसी तमिलनाडु सरकार पर भरोसा नहीं करेगी।"
करुणानिधि पीछे हटे और वादा निभाया। यह वही गलती नहीं थी जो पश्चिम बंगाल ने टाटा नैनो के साथ या आंध्र प्रदेश ने अमरावती के साथ की।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा: "एम. करुणानिधि और जे. जयललिता राजनीति में कट्टर दुश्मन सही, पर राज्य के औद्योगिकीकरण के मामले में टकराव नहीं करेंगे।"
DMK और AIADMK के बीच एक इनफॉर्मल पार्टनरशिप बन गई कि वे एक-दूसरे की इंडस्ट्रियल पॉलिसी को पलटेंगे नहीं। इस कंसिस्टेंसी ने ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे लॉन्ग-टर्म सेक्टर्स को भरोसा दिया।
नेटवर्क इफेक्ट: डेट्रॉइट ऑफ इंडिया
फोर्ड के बाद हुंडई आई। फिर BMW, डेमलर, रेनॉ, निसान, मित्सुबिशी और यामाहा। तमिलनाडु 'डेट्रॉइट ऑफ इंडिया' बन गया और आज दुनिया के टॉप 10 ऑटोमोबाइल हब में शुमार है।
राज्य में ऑटोमोबाइल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स की एक लंबी फेहरिस्त है। इससे एक पूरा इकोसिस्टम बन गया — टैलेंट हायर करना आसान, सप्लायर्स ढूंढना आसान, और चेन्नई, एन्नोर और कट्टुपल्ली जैसे तीन बड़े पोर्ट की वजह से एक्सपोर्ट करना बेहद आसान।
डिसेंट्रलाइज्ड ग्रोथ
खास बात यह है कि यह नेटवर्क सिर्फ चेन्नई तक सीमित नहीं है। 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु का आधा GDP आठ अलग-अलग जिलों से आता है। चेन्नई 12%, कोयंबटूर 6%, और तिरुपुर, तिरुचि, वेलोर जैसे शहर 2-5% योगदान देते हैं। जबकि कर्नाटक की 36% GDP सिर्फ बेंगलुरु से आती है और महाराष्ट्र की ग्रोथ मुंबई-पुणे में सिमटी है।
करप्शन का सच: परफेक्ट नहीं, पर एफिशिएंट
यह कहना गलत होगा कि सब कुछ परफेक्ट है। एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कन्नन रामस्वामी बताते हैं कि जब एक साउथ कोरियन कंपनी प्लांट खोलना चाहती थी, तो सरकारी अधिकारियों ने जमीन की कीमत का 50% घूस मांगा।
करप्शन केस की लिस्ट लंबी है:
- ➤ डी. मुरुगन (सीनियर DMK लीडर) — 5 करोड़ की असंगत संपत्ति का केस, अप्रैल 2025 में दोबारा चल रहा है।
- ➤ ई.के. पलानीस्वामी (पूर्व AIADMK मुख्यमंत्री) — 5000 करोड़ के टेंडर पर सवाल।
- ➤ जयललिता और शशिकला — चेन्नई के पोएस गार्डन स्थित घर को मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल करने के आरोप।
लेकिन एक दिलचस्प ऑब्जर्वेशन यह है कि तमिलनाडु में करप्शन 'एफिशिएंट' है — एक जगह पैसा देना पड़ता है, जबकि दूसरे राज्यों में दो-तीन जगह देना पड़ता है। करप्शन के बावजूद काम चल रहा है और इन्वेस्टमेंट आ रहा है।
दूसरे राज्यों के लिए सबक
तमिलनाडु ने दिखा दिया है कि डबल डिजिट ग्रोथ संभव है। हम फैक्ट्रियां बना सकते हैं, इंजीनियर्स को नौकरियां दे सकते हैं, और महिलाओं को आजीविका दे सकते हैं।
जिस तरह तमिलनाडु में दो पार्टियों ने कंपटीशन किया कि कौन राज्य को आगे ले जा सकता है — वैसा ही कंपटीशन हमें सभी भारतीय राज्यों के बीच चाहिए। गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, सिक्किम, असम — सब एक-दूसरे से सीखें और बेहतर करें।
और जब ऐसा हो जाएगा, तब इंडिया सच में बन सकता है विकसित भारत।
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