Reality of Indian Street Food
Indian Street Food Hygiene Exposed: The Hunger Games Investigation
कई टाइम से इंडियन स्ट्रीट फूड सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, पर अच्छे रीज़ंस की वजह से नहीं। अगर आप किसी फॉरेनर से पूछोगे तो एक अच्छी चांस है कि उन्होंने ऐसे कोई वीडियोस देखे होंगे। “बिफोर दे हैड टू वाश माय प्लेट... क्लीन माय प्लेट विथ द सेम वाटर दिस वास वाशिंगट।” तो इंडियन स्ट्रीट फूड की हाइजीन को इन्वेस्टिगेट करने के लिए आई डिसाइडेड टू प्ले हंगर गेम्स विद माय टीम्स।
Mission Across Three Cities
मैंने तीन टीम्स डिस्पैच करी हमारे देश के तीन शहरों में और उनका मिशन बहुत सिंपल है: इंडियन स्ट्रीट फूड के बारे में सच जानना।
Bengaluru टीम A: अंतरा और अम – शवरमा
Kolkata टीम B: आदि और अद्रजा – पुचका
Delhi टीम C: वीना और मोहित – मोमोज
हर टीम को एक डिश असाइन करी गई है। उनकी जॉब बहुत सिंपल है। फूड कलेक्ट करना है, उसको इंस्पेक्ट और टेस्ट करना है। टेस्ट वाइज इट वास लाइक। वेंडर्स को पूछना है कि उनके इंग्रेडिएंट्स आते कहां से हैं? वी प्रोक और फिर सैंपल्स एक लैब में भेजने हैं फूड सेफ्टी टेस्टिंग के लिए।
Bengaluru: The Shawarma Trail
कारनामा स्टार्ट होता है बेंगलुरु में। कमन्ना हल्ली जाती है उधर का शवरमा टेस्ट करने के लिए। कामनहली का स्पेशलिटी है शवरमा। यहां पे बहुत सारे शवरमा जॉइंट्स हैं। हमने तीन जगहों को शॉर्टलिस्ट किया है: अल अमना, स्मोकी डॉकी एंड बिग फैट रूम। इन जगहों को हमने सेलेक्ट किया या तो दूसरे लोगों के रेकमेंडेशंस पर या फिर Google रिव्युज़ के बेसिस पर।
Smoky Docky
पहली जगह है स्मोकी डॉकी। ये मेरे एक्चुअली मैकेनिक ने सजेस्ट किया था। अब खाने को चखने से पहले आई वांट टू टेल यू व्हाई आई मेड दिस वीडियो, व्हिच इज टू अंडरस्टैंड कि हमारे देश के स्ट्रीट फूड में प्रॉब्लम है क्या? कई बार हम न्यूज़ पढ़ते हैं कि कैसे हार्मफुल केमिकल्स और ऑइल्स की वजह से हमारे खाने में एक कलर या टेस्ट आ जाता है।
हमने शवरमा का ऑर्डर दिया, रेगुलर शवरमा ताकि कंसिस्टेंट रहे। और जब वो ऑर्डर का वेट करते हैं उन्होंने उस जगह को इन्वेस्टिगेट किया। एंड मोस्टली इट वास वै क्लीन। कुकिंग एरिया में साफ सफाई थी। कोई बदबू नहीं आ रही थी और कहीं गंदगी इतनी नजर नहीं आई। पर किसी भी वर्कर ने ग्लव्स नहीं पहने। जब हम खाने को अपने हाथों से ट्रांसफर करते हैं स्पेशली उन जगह जहां पसीने हो सकते हैं तो बैक्टीरिया ट्रांसफर होता है जिससे वोमिटिंग और फूड पोइजनिंग हो सकती है।
रिसेंटली बेंगलुरु के कई शवरमा आउटलेट्स पर रेड हुई है। कर्नाटका सरकार ने 17 सैंपल्स कलेक्ट करे 10 डिस्ट्रिक्ट से और 17 में से बस नाइन ही साफ और हाइजीनिक निकले। इसी साल एक स्टडी में नूडल्स और पानी पूरी के 40% सैंपल्स में वही बैक्टीरिया मिला जिससे फूड पोइजनिंग होती है।
खाना अच्छा था, चिकन फ्रेश लगा। स्टाफ ने बताया कि वो हर दिन फ्रेश बनाते हैं, चिकन डेली आता है। पर चिकन का सोर्स उन्हें मालूम नहीं था। ओवरऑल जगह साफ थी पर वर्कर्स कोई भी ग्लव्स यूज़ नहीं कर रहे थे।
Big Fat Roll
नेक्स्ट डेस्टिनेशन है बिग फैट रोल। यहां पे हमें बहुत भीड़ दिखी। चिकन की क्वालिटी काफी अच्छी थी, फ्रेश लग रहा था। पर चिकन मुझे थोड़ा सा अंडर कुक लग रहा है। फिर भी टेस्ट फ्रेश था और मीट में ना कोई अजीब स्मेल थी। जगह भी साफ थी और स्टाफ ग्लव्स भी पहना था।
Al Amanah
फिर हम पहुंचते हैं अल अमाना। इस जगह को 24 हज़ार रिव्यूज मिले थे विथ एन एवरेज रेटिंग ऑफ़ 4.2। पर भाई जगह तो देखो। एम्बियंस बहुत घटिया था। अंदर बहुत ऑयली सी स्मेल आ रही थी। खाना का ऐसा कलर था जैसे मानो केमिकल कलरिंग कर रखी हो।
यह फूड कलरिंग अनफॉर्चुनेटली बहुत ही कॉमन है। गोभी मंचूरियन में जो रेड कलर होता है वो एक केमिकल डाइस से आता है जिसका नाम है रोडमीन बी, जो टेक्सटाइल इंडस्ट्री में यूज़ आता है। कर्नाटका सरकार की रिपोर्ट के अनुसार 62% गोभी मंचूरियन सैंपल्स में रोडमीन बी मिला। डॉक्टर शालिनी जोशी कहती है कि ऐसी डाइस की वजह से लिवर कैंसर तक हो सकता है।
वेंडर्स ऐसे केमिकल्स क्यों यूज़ करते हैं? पैसा। एक सेफ फूड कलर की 15ml बोतल ₹150 की है, जबकि 1 किलो रोडमिन बी सिर्फ ₹1000 में मिलता है। सरप्राइजिंगली यहां सबसे ज्यादा भीड़ थी, क्योंकि लोगों को वैल्यू फॉर मनी चाहिए। पर सस्ते में अच्छा खाना मिलने का मतलब हॉस्पिटल का बिल भी हो सकता है।
Kolkata: The Puchka Test
टीम बी जाती है कोलकाता के सदर्न एवेन्यू टू टेस्ट पुचका। कोलकाता वही जगह है जहां से वायरल वीडियो देखने को मिलते हैं। हम तीन अलग पुचका वेंडर्स के पास गए।
Street Vendor 1 (Southern Avenue)
पहली नजर में यह स्टॉल साफ सुथरा दिखा, ना कोई मेजर ड्रेनेज का इशू और ना मक्खियां। लेकिन कोई भी वेंडर ग्लव्स नहीं पहनता। इसी साल अप्रैल में 31 स्टूडेंट्स पानी पूरी खाने के बाद हॉस्पिटलाइज हो गए थे। ई कोलायम सबसे कॉमन बैक्टीरिया है जो गंदे हाथों, बिना धुली सब्जियों या गंदे पानी से फैलता है।
वेंडर ने बताया कि सारी चीजें घर पर बनती हैं और आरती के समय का पानी है। विजुअली जगह क्लीन थी और पुचका का टेस्ट अच्छा था, स्टैंडर्ड कोलकाता क्वालिटी।
AC Established Outlet
अगली जगह एयर कंडीशन दुकान थी, मिनरल वाटर और प्रीमियम ऑयल का दावा। पर स्टाफ ने बात करने या रिकॉर्ड करने की परमिशन नहीं दी। हमने पैकेट खरीदा। जगह साफ सुथरी थी, वर्कर्स ने हेयर कैप और ग्लव्स पहने थे। यूटेंसिल्स भी क्लीन लगे। पर टेस्ट पसंद नहीं आया। स्टफिंग बहुत कम थी, चटपटा नहीं था और पानी भी टेस्टी नहीं था। ओवरऑल अंडरवेल्मिंग लगा।
Bazaar Area Vendor
आखिरी दुकान बाजार एरिया में थी। इधर भी वर्कर्स ने ना ग्लव्स पहने थे ना हेयर कैप, पर भीड़ बहुत थी। प्रोसेस ओवरऑल हाइजीनिक लगा। इंग्रेडिएंट्स लोकली सोर्स थे और पानी घर के आरो डिस्पेंसर से लाया जाता था। टेस्ट और प्रिपरेशन काफी हद तक सही लगे।
Delhi: The Momo Mystery
दिल्ली की टीम सी में वीना और मोहित मोमोज़ टेस्ट कर रहे हैं। सबसे पहले वो जाते हैं डोलमा आंटी के स्टोर पर।
Dolma Aunty’s (Viral Spot)
वो ऑर्डर करते हैं चिकन स्टीम मोमोज़। एम्प्लई से पूछने पर बताया कि सामान फ्रेश होता है और बचता ही नहीं। जगह साफ सुथरी लगती है, पर पास खड़े कपल ने कहा कि उन्होंने वेज मोमोज ही खाए क्योंकि उनको मीट पर विश्वास नहीं है।
पिछले साल एक 19 साल का लड़का मुंबई में शवरमा खाकर गया और उल्टी-पेट दर्द से मृत्यु हो गई, मोस्ट लाइकली सलमनेला इनफेक्शन से। यह कोई अकेला इंसिडेंट नहीं है।
फिर भी कई कस्टमर्स को टेंशन नहीं होती। कुछ ने कहा कि नाम सुना है तो एन्जॉय करेंगे, हाइजीन पर सवाल नहीं करते। मोमोज का प्रेजेंटेशन अच्छा था, प्लेट साफ थी। स्टाफ ने ग्लव्स नहीं पहने। मीट टेस्ट और स्मेल में कोई प्रॉब्लम नहीं थी।
Street Stall 1 (Factory Supplied)
एक और पॉपुलर जगह पर आदमी ने बताया कि मोमोज फैक्ट्री में बनते हैं और सप्लाई होते हैं। हर दिन करीब 4000 प्लेट बिकती हैं। सामान सुबह-सुबह ताजा आता है और वो खुद भी खाता है। पर मीट का सोर्स नहीं बता पाए। स्टॉल साफ सुथरा लगा।
Street Stall 2 (Chirag Delhi)
आखिरी जगह ने बताया कि उनके मोमोज चिराग दिल्ली की फैसिलिटी में बनते हैं और रोज का सामान खर्च हो जाता है। जगह साफ सुथरी लगी पर ग्लव्स और मास्क को भूल ही जाओ।
Lab Results: The Shocking Truth
फिर इन सब जगहों के सैंपल्स लैब की टेस्टिंग में भेज दिए गए। हमने सात बैक्टीरिया (इंक्लूडिंग शगैला और सालमनेला) और फूड कलर्स/केमिकल्स के लिए टेस्ट करवाया।
Bengaluru Shawarma Results
बेंगलुरु के तीनों शवरमा सैंपल्स में कोई प्रॉब्लम नहीं थी। यहां तक कि जिस जगह का टेस्ट अजीब था, वो भी लैब में पास हो गया। कोई हार्मफुल बैक्टीरिया या केमिकल नहीं मिला।
Kolkata Puchka Results
कोलकाता के एक सैंपल में ई कोलाई मिला। आइडियली खाने में इसकी जीरो मात्रा होनी चाहिए, पर साइंटिस्ट कहते हैं कि कुछ लेवल हार्मफुल नहीं है। जो मिला वो एक्सेप्टेबल लेवल से कम ही था। बाकी कोई केमिकल नहीं मिला।
Delhi Momos Results
दिल्ली के तीनों मोमो सैंपल्स में स्टाफ (Staph) मिला। यह एक ऐसा जर्म है जिससे फूड पोइजनिंग और डायरिया हो सकता है। यह तब पाया जाता है जब लोग गंदे हाथों से खाने को टच करते हैं या खाना खुली हवा में देर तक रखा रहता है। टीम मेंबर ने सैंपल को छुआ तक नहीं था, इसलिए सोर्स स्टॉल ही थे।
Why is Street Food Hygiene a Problem?
मोस्टली हमें यह मिला कि स्ट्रीट फूड सेफ है, पर क्या ये एक्चुअली ट्रू है? एक पॉसिबिलिटी सैंपल बायस की भी हो सकती है। पर वायरल वीडियोज की सच्चाई यही है कि लोगों को साफ सफाई की जानकारी तो है, पर करना नहीं चाहते।
FSSAI के रूल्स के हिसाब से हर फूड बिनेस को रजिस्टर करना पड़ता है, पर बस 33% स्ट्रीट वेंडर्स ही रजिस्टर्ड हैं। पूरे देश में 1 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स के लिए करीब ढाई हजार फूड सेफ्टी ऑफिसर्स हैं। यानी हर 4000 वेंडर्स के लिए एक ऑफिसर।
सिंगापुर की तरह इंडिया में स्ट्रीट फूड के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। स्टॉल्स ओपन और क्राउडेड एरियाज में हैं, जहां धूल मिट्टी, साफ पानी और डस्टबिन नहीं होते। कई बार गंदा पानी बर्तन धोने में यूज़ होता है और टॉयलेट्स भी नहीं होते।
The Singapore Solution
सिंगापुर में भी एक टाइम ऐसी प्रॉब्लम्स थीं। फिर सरकार ने हॉक सेंटर्स बनाए, जो डेडिकेटेड फूड कोर्ट्स हैं। वहां साफ पानी और सफाई का सिस्टम है। हर स्टॉल को A, B, C, D रेटिंग दी जाती है, जो कस्टमर को दिखती है। इससे कंपटीशन क्रिएट होता है और हर वेंडर साफ रहना चाहता है।
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