Why Rajasthan Has NO JOBS

राजस्थान विधानसभा चुनाव: कुर्सी की जंग और बेरोजगारी का सच

सत्ता की दावेदारी के बीच सड़कों पर जूते पॉलिश करते नौजवानों का राजस्थान

चुनावी शोर और अटकलों का बाजार

कुछ ही दिन में राजस्थान के लोग अपनी अगली सरकार चुनने जा रहे हैं। राजस्थान में विधानसभा चुनाव का बिगुल बन चुका है। कौन बनेगा मुख्यमंत्री? चुनावी संग्राम, घोषणाओं का गमासा, हर पार्टी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने वाली है। लोग अटकलें लगा रहे हैं कि क्या कांग्रेस पार्टी वापस इलेक्शन जीत पाएगी और अगर हां तो चीफ मिनिस्टर की गद्दी पर कौन बैठेगा? अशोक गहलोत या फिर सचिन पायलट? द कांग्रेस पार्टी इज होल्डिंग अ की मीटिंग टू डिस्कस द राजस्थान पावर बैटल बिटवीन चीफ मिनिस्टर अशोक गहलोत एंड हिज आर्च राइवल सचिन पायलट। जनता के हित के बजाय यहां कुर्सी लूटने और कुर्सी बचाने का ही खेल चल रहा है। दूसरी तरफ सवाल है कि बीजेपी का चीफ मिनिस्टीरियल कैंडिडेट कौन होगा? वसुंधरा राजे या फिर नरेंद्र मोदी के पास एक नया नाम है।

पर कई लोग एक सवाल के बारे में भूल गए हैं कि राजस्थान की बेरोजगारी का क्या होगा?

डराने वाले आंकड़े: जब सड़कों पर आया गुस्सा

राजस्थान में बेरोजगारी दर के आंकड़े डराने वाले हैं। सरकार भर्तियां भी निकालती है जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। लगातार बेरोजगारी के आंकड़े जो सामने आ रहे हैं वह चिंताजनक हैं। राजस्थान का नौजवान इतना तंग आ गया कि पिछले साल सितंबर में नौजवान ने गांधीगिरी अपना ली, सड़कों पर ताकि लोग बेरोजगारी पर ध्यान दें। वो जयपुर की सड़कों पर लोगों के जूते पॉलिश करने लग गए। ये इसलिए है क्योंकि अर्बन अनइंप्लॉयमेंट की हालत राजस्थान में बहुत बुरी है।

शहरी बेरोजगारी का गंभीर संकट

अर्बन अनइंप्लॉयमेंट रेट है 8.5%

अगर आप देश की बड़ी स्टेट्स को कंपेयर करोगे तो राजस्थान की हालत सबसे बेकार है।

"हमारे साथ धोखा क्यों? हम पिछले तीन दिन से पड़े हुए हैं इसके में और फिर मुकदमा दे रहे हो? ये लो एफ नंबर 133... यह विदाई कु थाने में मुकदमा द किया... क्या हमारे बेरोजगारों के ऊपर..."

यह सिचुएशन सबसे बुरी है नौजवानों के लिए। अगर हम राजस्थान के 15 से 29 साल के नौजवान पर नजर डालेंगे जो राजस्थान के शहरों में रहते हैं तो उनमें से 24% लोग बेरोजगार हैं।

बेरोजगारी भत्ता: समाधान या चुनावी जुमला?

चीफ मिनिस्टर अशोक गहलोत अनाउंसमेंट अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस फॉर द यूथ ऑफ द स्टेट। अब सरकार ने एक अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस स्कीम तो अनाउंस करी, पर क्या इससे बेरोजगारी सॉल्व होएगी?

जमीनी कहानियां: डिग्री की बेबसी

राजस्थान के सवाय माधवपुर जिले के कस्बा बॉली शहर में रहते हैं 31 साल के राकेश कुमार। आठ भाई बहनों में से अकेले वो हैं जिनको कॉलेज डिग्री मिली। उनको उम्मीद थी कि उनको एक जॉब आसानी से मिल जाएगी, पर बाद में उनको पता चला कि ऐसा नहीं है। आज वह अपने शहर में घर-घर जाकर उनकी दीवारों को पेंट कर रहे हैं अपना खर्चा पानी चलाने के लिए। ऐसी ही कहानियां सुनकर 33 साल के उपेंद्र यादव ने एक पेज बनाया जिसको 1 लाख से ज्यादा लोग फॉलो कर रहे हैं। वो है राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के स्टेट हेड।

तो सवाल है कि राजस्थान में बेरोजगारी इतनी है क्यों और इसका किया क्या जा सकता है?

डाटा को समझना: शहर बनाम गांव, पुरुष बनाम महिला

पहले डिस्कस करते हैं कि मैं कौन सा डाटा यूज कर रहा हूं अपनी एनालिसिस के लिए। अनइंप्लॉयमेंट डाटा के लिए दो बड़ी सोर्सेस हैं: पहली सोर्स है गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेज जो वो हर साल करवाते हैं और दूसरी सोर्स है सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी यानी कि सीएमआईई। सीएमआईई के हिसाब से हरियाणा के बाद राजस्थान में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है हमारे देश में। पर हाल ही में कई लोगों ने सीएमआई डाटा की आलोचना करी है, भारत सरकार ने भी और कई इंडिपेंडेंट इकॉनमिस्ट। इसी वजह से जो अपने वीडियो में मैं एनालिसिस करने जा रहा हूं वो सरकारी डाटा यूज करके करने जा रहा हूं यानी कि पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे।

जब हम राजस्थान के इस डाटा पर नजर डालेंगे हमें दो इंटरेस्टिंग चीजें दिखेंगी।

पहली चीज: शहरों में ज्यादा बेरोजगारी

बेरोजगारी शहरों में ज्यादा है। गांवों से जो अनइंप्लॉयमेंट रूरल एरियाज में 3.4% है, अर्बन एरियाज में है 8.5%। ये चीज बस राजस्थान में ही नहीं पाई गई, कई स्टेट्स में बेरोजगारी की प्रॉब्लम शहरों में ज्यादा है, चाहे वो उत्तर प्रदेश हो, हरियाणा हो या फिर तमिलनाडु। बस पंजाब जैसे कुछ स्टेट्स ही हैं जहां अर्बन और रूरल अनइंप्लॉयमेंट या तो सिमिलर है या फिर शहरों में कम है।

राजस्थान की बात करें तो उनकी जो लेबर फोर्स है वो ज्यादातर गांव में रहती है और 41% लेबर फोर्स एग्रीकल्चर सेक्टर में काम कर रही है। गांवों में बेरोजगारी कम होने का एक कारण है कि उधर कई सरकारी स्कीम्स हैं जो एंप्लॉयमेंट देती है। महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट या मनरेगा जो गारंटी देती है कि लोगों को 100 दिन का काम मिल जाएगा अनस्किल्ड मैनुअल लेबर के तौर पर। राजस्थान सरकार के डाटा के हिसाब से 2021 के फाइनेंशियल ईयर में करीब 89% लोग जिन्होंने स्कीम के तहत काम मांगा उनको काम मिल गया।

समस्या यह है कि राजस्थान के शहरों में ऐसी कोई स्कीम नहीं है जिस वजह से उधर बेरोजगारी ज्यादा है।

दूसरी चीज: महिलाओं में बड़ी समस्या

महिलाओं में बेरोजगारी की प्रॉब्लम और बड़ी है मर्दों के कंपैरिजन से। सरकारी डाटा के हिसाब से मेल अर्बन अनइंप्लॉयमेंट रेट है 7.7% जबकि फीमेल रेट है 11.3%। राजस्थान में अनीता जैसी बहुएं लाचार पहुंचती है। 9 साल पहले शादी हुई, राजस्थान आई, पति बेरोजगार है, पत्नी ने परीक्षा पास की लेकिन नियमों की मार ने बेरोजगार बना रखा है। ऐसी कई महिलाओं ने एक दफा नहीं दो बार एग्जाम क्वालीफाई कर लिया है पर उनको नौकरियां मिली नहीं।

जड़ तक जाना: इतनी बेरोजगारी क्यों है?

1. शिक्षा का संकट: नींव ही खोखली

पहला कारण है एजुकेशन। 2022 के लेटेस्ट सरकारी डाटा के हिसाब से सबसे ज्यादा नॉन लिटरेट लोग बिहार और आंध्र प्रदेश के बाद राजस्थान में है। राजस्थान के 31.7% लोग लिख पढ़ नहीं सकते जबकि इंडिया की एवरेज है 23.3%। अगर हम फीमेल लिटरेसी की बात करें तो पूरे देश में राजस्थान सबसे पीछे है। राजस्थान की 44.6% महिलाएं पढ़ लिख नहीं सकती। इस मामले में राजस्थान और बिहार के आसपास कोई भी स्टेट डगमगा नहीं रही।

बहुत अजीब बात है कि राजस्थान की कोटा में देश से 2 लाख से ज्यादा लोग जाते हैं हर साल जेई और नीट जैसे चैलेंजिंग एग्जाम्स की प्रिपरेशन के लिए, पर राजस्थान की पॉपुलेशन के कई लोग खुद लिख पढ़ नहीं सकते।

प्रथम इंडिया की रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा: 2022 में बस 38.2% राजस्थानी बच्चे जो फिफ्थ क्लास में थे, वो सेकंड क्लास का टेक्स्ट पढ़ पाए। 2012 में ये नंबर 46.8% था। 10 साल में सिचुएशन बेहतर होने की बजाय और बिगड़ गई।

लड़कियों के लिए सिचुएशन तो और भी बुरी है। बच्चियां आठवीं तक पढ़ती है, उसके बाद क्लासों को छोड़ जाती है। उसका या तो बच्चियों को शादी कर दी जाती है या उनको घरेलू काम में लगा लिया जाता है। 2022 की प्रथम की रिपोर्ट ने दिखाया कि राजस्थान की 53.4% माएं कभी स्कूल गई ही नहीं जो पूरे देश में सबसे हाईएस्ट नंबर है।

2. स्कूल मर्जर की नाकाम नीति

2014 में बीजेपी सरकार ने अनाउंस किया था कि पैसों की कमी के चलते कई स्कूल्स को कंबाइन कर रही हैं। राजस्थान एजुकेशन डायरेक्टरेट ने बताया कि 2014-2018 के बीच 22000 से ज्यादा स्कूल्स मर्ज कर दिए गए। इस पॉलिसी का अंजाम यह हुआ कि कई बच्चों को घंटे ट्रेवल करना पड़ा अपने स्कूल तक पहुंचने के लिए। कई स्कूल्स मर्ज तो कर दिए गए पर उधर इंफ्रास्ट्रक्चर था नहीं। 2022 की रिपोर्ट ने दिखाया कि राजस्थान के 87% सेकंड क्लास के स्टूडेंट्स उन स्टूडेंट्स के साथ बैठे हुए थे जो फर्स्ट क्लास या उससे कम की क्लास के हैं।

3. कॉलेज डिग्री की घटती कीमत

राजस्थान की सरकार ने बताया कि 2023 में उनके पास करीब 18.5 लाख रजिस्टर्ड बेरोजगार लोग थे जिनमें से 14.5 लाख तो ग्रेजुएट्स थे। भारतीय सरकार के 2020 में हुए ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन ने दिखाया कि राजस्थान में करीब 3070 कॉलेजेस हैं यानी कि हर लाख लोगों के लिए 40 कॉलेज। क्वांटिटी में कोई प्रॉब्लम नहीं है, प्रॉब्लम है उनकी क्वालिटी में।

राजस्थान यूनिवर्सिटी का एक उदाहरण: उधर 61 सैंक्शन पोस्ट है प्रोफेसर्स की पर उनमें से 58 खाली हैं। इस चीज को सॉल्व करने के लिए कांग्रेस सरकार ने 2019 में आमंत्रित किया कि लोग प्रोफेसर की पोस्ट पर अप्लाई करें, पर वॉलेंटियर बेसिस पर, ना पैसा दिया जाएगा ना ट्रेवल अलाउंस।

4. स्किल डेवलपमेंट की दुर्गति

2019 के स्टेट बजट में पता चला कि जहां सरकार अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस के लिए 525 करोड़ खर्च कर रही थी, स्किल डेवलपमेंट के लिए वो खर्च कर रही थी बस 54 करोड़। राजस्थान में करीब 1800 आईटीआई हैं जो देश में सेकंड हाईएस्ट है, पर 2021 में करीब 1 लाख आईटीआई सीटों में से बस 39% ही फिल हुई थी। एक रिसर्च ने दिखाया कि राजस्थान में करीब 18,225 लोगों ने आईटीआई ट्रेनिंग कंप्लीट करी, उनमें से महज 22 लोगों को प्लेसमेंट मिली — यानी प्लेसमेंट रेट 0.12%।

5. पेपर लीक का खेल

प्रेम चौधरी एक 25 साल के नौजवान हैं जिन्होंने राजस्थान एलिजिबिलिटी एग्जामिनेशन फॉर टीचर्स दिया था। एक साल जयपुर में कोचिंग ली जिसके लिए परिवार ने लाखों रुपये दिए। पर एग्जामिनेशन के बाद हुआ क्या? पेपर लीक। 2011 और 2022 के बीच राजस्थान में 26 पेपर लीक्स रिपोर्ट हुए हैं और पिछले 4 साल में तो 14 हुए थे। राजस्थान पुलिस ने एक स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप बनाया ऐसे पेपर लीक्स की इन्वेस्टिगेशन करने के लिए। 2022 में सरकार ने एक लॉ जरूर बनाया जहां 10 साल की जेल और 10 करोड़ का फाइन हो सकता है, पर इस लॉ के पास होने के कुछ महीने बाद एक और पेपर लीक हो गया।

6. इंडस्ट्रियल विकास की सुस्त रफ्तार

राजस्थान के लोग सरकारी नौकरियों की तरफ भाग रहे हैं क्योंकि प्राइवेट सेक्टर में इतनी नौकरियां नहीं है। 1989 में तब के राजस्थान चीफ सेक्रेटरी वीबीएल माथुर ने कहा था कि इंडस्ट्रियलाइजेशन अब स्टार्ट हो गई है, पर 34 साल बाद सिचुएशन बहुत अलग है। नीति आयोग की रिपोर्ट ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बस 7.5% जॉब्स क्रिएट कर रहा है जबकि टारगेट 20% है।

उड़ीसा के बाद मिनरल एक्सप्लोरेशन में राजस्थान सबसे प्रॉमिसिंग है, 9% मिनरल प्रोडक्शन राजस्थान से आता है। पर दिलीप बैद (एक्स चेयरमैन, सीआईआई राजस्थान) ने कहा कि राजस्थान में कई मिनरल्स और रॉ मटेरियल हैं पर इंडस्ट्रियलाइजेशन ना होने की वजह से वैल्यू एडिशन नहीं कर पाते। राजस्थान से रॉ मटेरियल बांग्लादेश तक एक्सपोर्ट हो रहा है पर प्रोसेसिंग नहीं हो रही।

बजट की विडंबना: 2022 के बजट में सरकार ने पावर सब्सिडी पर 16,000 करोड़ खर्च करे, जबकि रोड्स और ब्रिजे पर बस 9,000 करोड़।

आगे का रास्ता: क्या किया जा सकता है?

राजस्थान में रोजगार के सॉल्यूशंस इतने कॉम्प्लिकेटेड नहीं है, कॉम्प्लिकेट है उनको एग्जीक्यूट करना।

पहला: राजस्थान सरकार का कई सालों से हाई फिस्कल डेफिसिट रहा है। सब्सिडीज को एफिशिएंट बनाने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यूज करना चाहिए।

दूसरा: राजस्थान सरकार को अपनी नेचुरल एडवांटेज को यूज करना होगा — एग्रो प्रोसेसिंग और मिनरल प्रोडक्शन में कंपनीज को अट्रैक्ट करना होगा।

तीसरा: आईटीआई और स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग पर फोकस करना होगा। नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने सुझाव दिया कि जयपुर में मोटर मैकेनिक्स का और कोटा में ट्रैक्टर मैकेनिक्स का स्कूल खुलना चाहिए।

आखिरी और सबसे जरूरी: राजस्थान अपनी इकोनॉमिक पोटेंशियल तब तक अचीव नहीं कर पाएगा जब तक उनकी लड़कियां पढ़ाई नहीं कर रही होंगी। राजस्थान के चुरू जिले में एक कंप्यूटर सखी प्रोग्राम लॉन्च हुआ है जिससे 70,000 महिलाओं को कंप्यूटर एजुकेशन दी जा रही है। जब महिलाओं को एजुकेशन मिलेगी, वो अपनी बेटियों को भी इनकरेज करेंगी।

उम्मीद है कि राजस्थान अपनी छवि बदल पाएगा और टूरिज्म के मामले में ही नहीं, बल्कि एजुकेशन के मामले में भी दूसरे लोगों को बोल पाएगा: पधारो म्हारे देश।